सागर
नवरात्रि के पावन अवसर पर नारी शक्ति चेतना समूह की 76 बहनों ने मां जगदंबा की आराधना करते हुए एक स्वर में संकल्प लिया कि समाज को “मां, बहन, बेटी” से जुड़ी अपमानजनक गालियों से मुक्त किया जाएगा। यह संकल्प केवल एक प्रतिज्ञा नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का आरंभ है।
समूह की संस्थापक श्रीमती प्रीति केसरवानी ने कहा कि मां दुर्गा सम्पूर्ण सृष्टि की जननी और स्त्री शक्ति का अनंत स्वरूप हैं। ऐसे में “मां, बहन, बेटी” की गाली देना, न केवल स्त्री जाति का, बल्कि मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप का अपमान है। उन्होंने उपस्थित मातृशक्ति को प्रेरित करते हुए कहा कि –
“जो व्यक्ति इस प्रकार की गालियों का प्रयोग करता है, उस पर मां जगदंबा की कृपा कभी नहीं होती।”
इस अवसर पर वैचारिक स्वच्छता अभियान संस्थापक डॉ. वंदना गुप्ता ने भी सभी को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब हर भक्त स्वयं में यह संकल्प ले कि जीवन में कभी भी इस अमर्यादित भाषा का प्रयोग नहीं करेगा। उन्होंने आह्वान किया कि –
“जब तक हमारी वाणी से मां, बहन, बेटी के प्रति सम्मान नहीं झलकेगा, तब तक नवरात्रि का व्रत अधूरा है।
यह सामूहिक प्रतिज्ञा वैचारिक स्वच्छता अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो समाज में मानसिक पवित्रता और महिलाओं के सम्मान को स्थापित करने हेतु सतत प्रयासरत है।










