सांसद द्वारा 12 से 14 जुलाई तक वैदिक वाटिया मकरोनिया में कराया जा रहा श्री महारूद्र यज्ञ, शिवलिंग निर्माण एवं शिव महापुराण सत्संग कथा के पहले दिन भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए संत श्री केशव गिरी जी महाराज ने कहा कि भगवान को जो चाहे वह साधु और जिसको भगवान चाहे वह संत है-केशव गिरी महाराज
प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री, नरयावली विधायक जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला भाजपा अध्यक्ष सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने कथा का श्रवण कर महाराज जी से आशीर्वाद लिया —
श्री रुद्र महायज्ञ पार्थिव शिव लिंग निर्माण एवं शिव महापुराण कथा का भव्य शुभारंभ
सागर
सांसद डॉ. लता गुड्डू वानखेड़े द्वारा वैदिक वाटिका, मकरोनिया में आयोजित श्री रुद्र महायज्ञ, असंख्य शिवलिंग निर्माण एवं श्री शिव महापुराण सत्संग का आयोजन अत्यंत भव्य रूप में प्रारंभ हुआ। इस पावन अवसर पर परम पूज्य संत श्री केशव जी गिरी महाराज के पावन सानिध्य में यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहा है। कथा के प्रथम दिन पूज्य संत श्री केशव जी गिरी महाराज ने अपने अमृत वचनों में कहा कि कथा रूपी गंगा के बहुत सुंदर और मानव कल्याण के घाट है भक्ति का घाट, ज्ञान का घाट, वैराग्य का घाट तप का घाट है और इन घाटों पर जाकर गंगा में गोते लगाने से हम मनुष्यों को धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा प्रसंग में उन्होंने पवित्र गंगा स्नान का महत्व बताते हुए कहा कि यदि व्यक्ति में भगवान शिव के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा हो तो उसके दान-पुण्य के सभी कर्म सफल हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि शिव महापुराण की यह अमूल्य कथा स्वयं भोलेनाथ ने नंदी महाराज को सुनाई नंदी से सनकादिक ऋषियों को सनकादिक ऋषियों ने व्यास जी को फिर सूतजी और फिर सूतजी ने यह कथा नैमिशारण्य में सौनकादि ऋषियों को सुनाई। यह पवित्र ग्रंथ सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला है क्योंकि इसकी उत्पत्ति स्वयं शिवजी के मुख से हुई है। कथा में पूज्य संत ने यह भी कहा कि मनुष्य शरीर मोक्ष प्राप्ति का साधन है, इसलिए इस जीवन को भगवान स्मरण में लगाना ही सच्चा कल्याण है। रामचरितमानस का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जो भगवान के नाम का स्मरण करते हैं, उनका स्वयं भगवान कल्याण करते हैं। उन्होंने नैमिशारण्य तीर्थ की महिमा बताते हुए भारत में जन्म को सौभाग्य की बात कहा और संत तथा साधु के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा, “जो भगवान को चाहता है, वह साधु है, लेकिन जिसे भगवान चाहते हैं, वह संत है।”
शिवलिंग निर्माण के साथ धर्म और श्रद्धा का संगम – शिव महापुराण कथा के शुभारंभ से पूर्व पूज्य संत श्री केशव गिरी जी महाराज, सागर सांसद डॉ. लता गुड्डू वानखेड़े, पूर्व मंत्री रामखिलावन पटेल तथा अन्य जनप्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुजनों ने सामूहिक रूप से शिवलिंग निर्माण में भाग लिया। मंत्रोच्चार एवं वैदिक विधि के साथ असंख्य शिवलिंगों का निर्माण किया गया, जिनका अभिषेक पूज्य महाराज द्वारा कराया गया इसके उपरांत श्रद्धालुओं ने उन शिवलिंगों को अपने सिर पर धारण कर श्रद्धाभाव से विसर्जन हेतु रवाना किया।
इस पावन आयोजन में विशेष रूप से मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, नरयावली विधायक श्री प्रदीप लारिया, पूर्व मंत्री श्री रामखिलावन पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हीरा सिंह राजपूत, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री श्याम तिवारी, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रीमती संध्या भार्गव, पूर्व जिलाध्यक्ष श्री हरिराम सिंह ठाकुर, श्री जाहर सिंह, श्री सुखदेव मिश्र, श्री वीरेंद्र पाठक श्री रामेश्वर नामदेव, श्री निकेश गुप्ता, श्री उमेश सिंह केवलारी, विजय गोतम, शिवकुमार यादव, संतोष ठाकुर, नंदू वाल्मीकि, बलराम तिवारी, राजकुमार बाथरे, सुनील शिंदे, हरिहर मिश्रा, रवि ठाकुर, सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, श्रद्धालु महिला-पुरुषों की उपस्थिति ने आयोजन को गौरवपूर्ण बना दिया।
कथा के प्रारंभ में कथा के यजमान गुड्डू वानखेड़े, डॉ. लता वानखेड़े एवं उनके पुत्र वैदिक वानखेड़े द्वारा पूज्य महाराज को व्यास गद्दी पर विराजमान कराया गया। तत्पश्चात महाराज जी आरती कर व्यासपीठ से कथा का शुभारंभ हुआ, जिसमें अमृत तुल्य वाणी से भगवान शिव की लीला और कृपा की व्याख्या हुई।
सांस्कृतिक प्रस्तुति एवं श्रद्धा भाव का अद्वितीय समर्पण – कथा के प्रारंभ में भगवान शिव की जीवंत झांकी एवं नृत्य-नाटिका का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने शिव की महिमा और तांडव की गाथा को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया। इस सुंदर झांकी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया और वातावरण शिवमय हो उठा।
उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में कई श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की स्मृति में सेवा और दान का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। गुड्डू वानखेड़े, राजा रिछारिया, अखिलेश गौर, रितेश तिवारी, जीतू खटीक आदि ने अपने पूर्वजों व माता-पिता की पुण्य स्मृति में शिवलिंग निर्माण हेतु आवश्यक कोपर महंत जी को समर्पित किए। यह सेवा भाव न केवल धार्मिक श्रद्धा को दर्शाता है, बल्कि सनातन संस्कृति में ‘पितृऋण’ के निर्वहन का प्रतीक भी है।










