पथरिया जाट में श्रीमद्भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं को दिया आध्यात्मिक संदेश, वेंकटेश्वर स्तोत्र का किया पाठ
पथरिया जाट
ग्राम पथरिया जाट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ के विशाल आयोजन में युवा नेता अविराज सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन संघर्ष, साहस, धैर्य और कर्म का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सबसे बड़ा साहस मौन धारण करना है तथा विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और संयम बनाए रखना ही वास्तविक महानता है।
अविराज सिंह ने शिशुपाल और भगवान श्रीकृष्ण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण ने सिखाया कि क्रोध का उत्तर क्रोध से नहीं, बल्कि धैर्य और विवेक से देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठिन समय मनुष्य को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे नई सीख देने के लिए आता है। चुनौतियां ही व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा ग्रहण करने की प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि संदीपनि ऋषि के आश्रम में उन्होंने एक सामान्य छात्र की तरह अध्ययन किया। उनके जीवन से सीख मिलती है कि मनुष्य को निरंतर सीखते रहना चाहिए, क्योंकि सीखना बंद होते ही अहंकार जन्म लेने लगता है। उन्होंने कहा, “मैं योग्य हूं” आत्मविश्वास है, जबकि “केवल मैं ही योग्य हूं” अहंकार है।
गौ सेवा और सनातन संस्कृति पर बोलते हुए अविराज सिंह ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गौ माता के संरक्षण और सम्मान का संदेश दिया है। उन्होंने गौधूलि बेला को अत्यंत शुभ बताते हुए कहा कि इस समय प्रभु स्मरण, पूजा-पाठ और स्तोत्र पाठ करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
उन्होंने नरकासुर प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सदैव उन लोगों का साथ देते हैं जिन्हें समाज असहाय छोड़ देता है। वहीं द्रौपदी चीरहरण का उदाहरण देते हुए कहा कि संकट की घड़ी में भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवश्य उपस्थित होते हैं।
अविराज सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ने संयमित और सार्थक वाणी का संदेश दिया है। अनावश्यक विवादों और कटु वचनों से दूर रहकर सकारात्मक संवाद स्थापित करना ही जीवन की सफलता का आधार है।
इस दौरान श्रद्धालुओं के आग्रह पर उन्होंने भगवान विष्णु के श्री वेंकटेश्वर स्तोत्र का पाठ भी किया। उन्होंने बताया कि उन्हें श्री वेंकटेश्वर स्तोत्र, शिव तांडव स्तोत्र तथा महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र कंठस्थ हैं।
कथा व्यास आचार्य पंडित सूरज तिवारी थे। आयोजन बाबूलाल यादव एवं समस्त यादव परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।










